NATIONAL HEALTH MISSION
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राज्य में परिवार कल्याण कार्यक्रम एक दृष्टि में

Mission Parivar Vikas- Rajasthan

वर्तमान में देश व राज्य की सबसे ज्वलन्त समस्या जनसंख्या की तीव्र वृद्धि है। इसके फलस्वरूप आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा कपडे़ की अपूर्णनीय मांग उत्पन्न हुई है, जो गरीबी, बेरोजगारी, भोजन एवं पानी की कमी तथा तदनुरूप समस्याओं की जनक है। कृषि जोतों के बढ़ते हुए विभाजन से खातेदारी छोटी, अलाभकर और परिवार के भरण-पोषण में अपर्याप्त हो गयी है, जिसके फलस्वरूप रोजगार की तलाश में ग्रामीणों का शहरी क्षेत्रों में पलायन हो रहा है। इस असीमित वृद्धि से राज्य के पर्यावरण पर भी विपरीत प्रभाव पड़ा है।

जनसंख्या वृद्धि का मुख्य कारण राज्य की विशेष भौगोलिक, सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक पृष्ठभूमि है। यहां का दो तिहाई भू-भाग मरूस्थलीय है और एक बड़ा भाग पर्वतीय एवं जनजाति क्षेत्र है। राज्य की महिला साक्षरता 52.10 प्रतिशत ही है। बच्चों के स्वस्थ एवं जीवित रहने की कम सम्भावना से अधिक बच्चों का जन्म, कम आयु में विवाह तथा लड़का पैदा करने की चाह के कारण प्रदेश की जन्मदर तथा शिशु मृत्यु दर अधिक बनी हुई है। राज्य की जनसंख्या के इतिहास पर यदि दृष्टि डाली जाये तो देखेंगे कि वर्ष 1901 में राज्य की जनसंख्या 1 करोड़ थी जो 1951 में बढ़कर 1 करोड़ 60 लाख हो गयी। इस अवधि में औसतन प्रतिवर्ष एक लाख से भी अधिक व्यक्तियों की वृद्धि हुई। 1951-61 के दशक में प्रतिवर्ष 4 लाख, 1961-71 में प्रतिवर्ष 5.6 लाख, 1971-81 में प्रति वर्ष 8.6 लाख, 1981-91 में प्रतिवर्ष 10.00 लाख, 1991-2001 में प्रतिवर्ष 12.5 लाख तथा 2001-2011 के दशक में प्रतिवर्ष 12.1 लाख जनसंख्या बढ़ी हैं। इस प्रकार तेजी से बढ़ती हुई राज्य की जनसंख्या वर्ष 2001 में 565.07 लाख व 2011 में 685.48 लाख हो गई है। जनसंख्या की असीमित वृद्धि के कारण राज्य का जनसंख्या घनत्व जो वर्ष 1981 में 100 व्यक्ति प्रतिवर्ग किलोमीटर था, 1991 में बढ़कर 129 हो गया, वर्ष 2001 में 165 तथा वर्ष 2011 में यह 200 व्यक्ति प्रतिवर्ग किलोमीटर हो गया है।

जनसंख्या वृद्धि की चुनौती का सामना करने के लिए परिवार कल्याण विभाग सचेत है तथा विभिन्न गतिविधियों एवं योजनाओं के माध्यम से जनसंख्या स्थायित्व के प्रयास किये जा रहे हैं। राज्य के प्रत्येक योग्य दम्पत्तियों को उनकी इच्छानुसार परिवार कल्याण की गर्भ निरोधक सेवाएं उपलब्ध करवाकर परिवार सीमित करने हेतु संरक्षित किये जाने का प्रयास किया जा रहा है।

आशा सहयोगिनियों के माध्यम से गांव-गांव में सीमित परिवार एवं बच्चों में अन्तराल की इच्छा रखने वाले दम्पत्तियों को परिवार कल्याण के अन्तराल साधन उपलब्ध करवाये जा रहे हैं।

 राज्य की जनसंख्या नीति के अन्तर्गत परिवार कल्याण कार्यक्रम हेतु जनसहभागिता के अतिरिक्त विभिन्न विभागों के सक्रिय उत्तरदायित्व को सुनिश्चित किया गया है ताकि कार्यक्रम अपनाने के लिए वृहद जनचेतना का वातावरण स्थापित हो सके। साथ ही इस नीति का उद्देश्य नागरिकों के स्वास्थ्य में सुधार का प्रयास करना, विशेष रूप से महिला एवं बाल स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धि को सुनिश्चित करना, जन्मदर के साथ शिशु एवं मातृ मृत्यु दर में कमी एवं आम जन को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाना है।

 

राज्य की 12 वीं पंचवर्षीय योजना के अन्तर्गत वर्ष 2017 तक निम्न स्वास्थ्य सूचक प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया हैः

क्र म

मद

वर्ष 2017 तक निर्धारित लक्ष्‍य

राजस्‍थान में अब तक की स्थिति

1

शिशु-मृत्यु दर (प्रति हजार जीवित जन्म पर)

40 47 (एस.आर.एस.-2013)

2

मातृ-मृत्यु दर

(प्रति लाख जीवित जन्म पर)

200

244 (एसआरएस 2011-13)

208 (ए.एच.एस. 2012-13)

3

कुल प्रजनन दर

2.5 2.8 (एस.आर.एस.-2013)
परिवार कल्याण कार्यक्रम क्रियान्वयन

 

परिवार कल्याण कार्यक्रम में गुणवत्ता लाने की दृष्टि से वर्ष 1996-97 से राज्य में विधिवार लक्ष्यों की समाप्ति कर दी गई है । इस कार्यक्रम के अन्तर्गत विधिवार लक्ष्यों को थोपना बन्द कर स्वास्थ्य कार्यकर्ता सम्बन्धित क्षेत्र की जनता की मांग के आधार पर लक्ष्य स्वयं निर्धारित करते हैं। इस योजना के अन्तर्गत राज्य के ग्रामीण क्षेत्र एवं शहरी क्षेत्र की कच्ची बस्तियों के समस्त प्रजनन योग्य दम्पत्तियों से सम्पर्क कर परिवार सीमित रखने के बारे में उनकी इच्छा की जानकारी प्राप्त की जाती है, तदानुरूप उन्हें गर्भ निरोधक के साधन उपलब्ध कराये जाते हैं। प्रतिवर्ष प्रत्येक योग्य दम्पत्ति का सर्वेक्षण कर सर्वे में परिलक्षित हुई सेवाओं की मांग के आधार पर उपकेन्द्र स्तर की वार्षिक कार्ययोजना तैयार की जाती हैं ।

 वार्षिक कार्य योजना के अनुसार लक्षित योग्य दम्पत्तियों से नियमित रूप से सम्पर्क करके उनकी इच्छानुसार परिवार कल्याण सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। प्रत्येक योग्य दम्पत्ति को अन्तराल साधन निरन्तर उपलब्ध हो सके, इसके लिए विभाग ने प्रत्येक उपकेन्द्र, प्रा.स्वा.केन्द्र, सामुदायिक स्वा. केन्द्र, जिला अस्पताल, डिस्पेन्सरी एवं इनके अतिरिक्त प्रत्येक गाँव में सामाजिक विपणन कार्यक्रम के तहत आषा सहयोगिनियों द्वारा अन्तराल साधन आपात्कालीन गर्भ निरोधक गोलियों एवं प्रेगनेन्सी टेस्ट किट उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इस कार्यक्रम के अन्तर्गत संख्यात्मक उपलब्धि के स्थान पर गुणात्मक सेवायें प्रदान करने पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है।

 परिवार कल्याण कार्यक्रम की सफलता सुनिष्चित करने के लिए प्रत्येक स्तर पर प्रभावी मॉनिटरिंग एवं मूल्यांकन किया जा रहा है। इसके लिए प्रत्येक माह प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र स्तर, ब्लॉक स्तर, जिला स्तर एवं राज्य स्तर पर समीक्षा बैठकें आयोजित कर कार्यक्रम की प्रभावी मॉनिटरिंग की जा रही है।

सामुदायिक आवश्यकता निर्धारण नीति (सी.एन.ए.ए.)

 

भारत सरकार द्वारा वर्ष अप्रेल, 1999 में स्वलक्षित पद्धति के स्थान पर आर.सी.एच. कार्यक्रम के अन्तर्गत सामुदायिक आवश्यकता अवधारणा नीति का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के अन्तर्गत परिवार कल्याण कार्यक्रम के अतिरिक्त अन्य स्वास्थ्य सेवाओं की मांग का भी आंकलन किया जाता है। सी.एन.ए.ए. के अन्तर्गत कुल 9 प्रकार के प्रपत्रों में सूचना संकलित/सम्प्रेषित की जाती है। जिसमें प्रपत्र संख्या 1 से 5 वार्षिक योजना के हैं तथा प्रपत्र संख्या 6 से 9 विभिन्न संस्था स्तर के मासिक प्रगति प्रतिवेदन के सम्बन्ध में है। इस अवधारणा के क्रियान्वयन से परिवार कल्याण कार्यक्रम, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम से सम्बन्धित सूचना एकत्रित की जा रही है तथा जिला एवं राज्य स्तर पर इसकी मासिक समीक्षा की जा रही है।

परिवार कल्याण कार्यक्रम के मुख्य उद्देश्य इस प्रकार हैः

 1.  जनसंख्या स्थायित्व 

2.  शिशु-मृत्यु नियंत्रण

3.  मातृ-मृत्यु नियंत्रण

जनसंख्या में स्थायित्व के लिए राज्य में अनेक परियोजनाएं/योजनाएं लागू की है जैसे- राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन, प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम-2, पंचायत/नगर पालिका एवं सहकारिता कानून में संशोधन आदि। इसके अतिरिक्त मातृ एवं शिशु-मृत्यु दर में कमी लाने के लिए विशेष कार्यक्रमों मातृ शिशु स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस, राजस्थान जननी शिशु सुरक्षा योजना (RJSSY) जननी सुरक्षा योजना (JSY) फेसिलिटी बेस्ड न्यूबॉर्न केयर यूनिट (FBNC), आदि का भी क्रियान्वयन किया जा रहा है।

परिवार कल्याण कार्यक्रम के अन्तर्गत गर्भ निरोधक साधनों की वर्षवार उपलब्धियां

क्र.स

वर्ष

नसबन्‍दी

आई.यू.डी निवेशन

ऑरल पिल्‍स उपयोगकर्ता

निरोध उपयोगकर्ता

पुरूष

महिला

कुल

1

1991&92

4759

168550

173309

158648

60225

375524

2

1992&93

4661

193491

198152

178744

47491

390887

3

1993&94

2908

200109

203017

169577

90335

512237

4

1994&95

2844

200274

203118

156060

92268

475272

5

1995&96

1952

166293

168245

168239

125230

519048

6

1996&97

1712

198999

200711

204765

204283

722682

7

1997&98

1425

222715

224140

224100

313664

869431

8

1998&99

1243

227776

229019

234629

374280

995378

9

1999&2000

1069

225203

226272

238720

426787

963802

10

2000&2001

1496

265894

267390

245697

479310

1035234

11

2001&2002

1410

250659

252069

239043

502265

1038129

12

2002&2003

1747

284122

285869

242236

606820

1277926

13

2003&2004

1769

298369

300138

265779

713714

1459849

14

2004&2005

8761

325210

333971

275257

756954

1507624

15

2005&2006

18048

299259

317307

305367

840733

1663593

17

2006&2007

6366

281723

288089

303358

863610

1777345

18

2007&2008

12555

322474

335029

337979

882337

1783439

19

2008&2009

12219

344704

356923

353877

925916

1866052

20

2009&2010

9314

336586

345900

409560

1050813

1254893

21

2010&2011

8200

330374

338574

407122

795327

987507

22

2011&2012

5528

309426

314954

395367

777115

944423

23

2012&2013

4949

311539

316488

393148

608628

765444

24

2013&2014

3769

298898

302667

374834

546404

689653

25

2014&2015

4304

299302

303606

387822

510986

634922

25

2015-2016 (दिसम्बर 15 तक) प्रोविजनल

3314

188986

192300

348637

461025

597151

पंचायत, नगर पालिका एवं सहकारिता कानून में संशोधन

 

परिवार कल्याण एवं जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रमों को दृष्टिगत रखते हुए राज्य सरकार ने सन् 1992 में पंचायत एवं नगर पालिका से सम्बन्धित कानूनों को संशोधित करते हुए इन संस्थानों के निर्वाचित सदस्यों पर दो सन्तानों की अवधारणा को लागू किया, जिससे जनप्रतिनिधि एक आदर्श प्रस्तुत कर सके एवं जन-जन तक प्रेरणा के स्त्रोत बन सकें। इन संशोधनों के अनुसार इन संस्थाओं के निर्वाचित सदस्यों के कार्यकाल में दो से अधिक बच्चे होने पर वे सदस्यता से वंचित हो जायेंगे एवं अगले चुनाव के लिए भी अयोग्य घोषित हो जायेंगे। इसी प्रकार सहकारिता कानून में भी संशोधन कर इसे लागू किया गया है।

 

राज्य में नौकरी प्राप्त करने एवं राज्य कर्मचारियों हेतु कानून में संशोधन

 

राज्य सरकार के कार्मिक (क-2) विभाग के पत्रांक प.7(1)कार्मिक/क-2/95 दिनांक 20.6.2001 के अनुसार राज्य में सरकारी नौकरियों में 2 बच्चों से अधिक बच्चे होने पर नौकरी के अयोग्य माना गया हैं तथा ऐसे राज्य कर्मचारी जिनके दिनांक 1.6.2002 के पश्चात् 2 बच्चों से अधिक बच्चे होने पर 5 वर्ष तक पदोन्नति से वंचित रखा गया हैं तथा वित्त विभाग (रूल्स डिवीजन) के आदेश क्रमांकःएफ.13(3)एफडी(रूल्स)/2001 दिनांक 4 अक्टूबर, 2001 द्वारा 3 बच्चों से अधिक संतान होने पर राज्य सेवा से सेवानिवृत्त कर दिया जाएगा

रिवेम्पिंग स्‍कीम

भारत सरकार के निर्देशानुसार वर्ष 1984-85 से राज्य के 11 शहरों जिनकी जनसंख्या एक लाख से अधिक है, उन शहरों की कच्ची बस्तियों में बीमारियों की रोकथाम, प्रारम्भिक उपचार, व्यक्तिगत स्वच्छता एवं खानपान की जानकारी आदि सेवाएं सुलभ करवाने हेतु 90 हेल्थ पोस्ट कार्यरत है।

स्टेटिक सेन्टर

नसबन्दी ऑपरेशन एवं अन्य प.क. सेवाओं की गुणवत्ता की सुनिश्चितता करने हेतु राज्य में 212 स्टेटिक सेन्टर स्थापित किये गये हैं। इन सेन्टर्स पर प्रति-दिन/नियत दिवस को नसबन्दी ऑपरेशन, कॉपर-टी निवेशन एवं अन्य परिवार कल्याण सेवाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं

चिकित्सकीय गर्भ समापन सेवाएं (एम.टी.पी.)

राज्य में अवांछित गर्भ धारण के उपरान्त दम्पत्ति की स्वेच्छा से गर्भ समापन करवाने हेतु सभी जिलों में एमटीपी प्रशिक्षित चिकित्सकों द्वारा सेवाऐं सुलभ करवाई जा रही हैं। इस हेतु विभाग के उन सभी चिकित्सालयों को चिकित्सकीय गर्भ समापन हेतु अधिकृत किया है जहां आवश्यक उपकरण तथा प्रशिक्षित चिकित्सक मौजूद है। जिलों की आवश्यकतानुसार चिकित्सकों को एमटीपी करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ये सेवाएं राज्य के मान्यता प्राप्त चिकित्सा संस्थानों पर भी उपलब्ध करवाई जा रही है।  

योजना की प्रगति गत 3 वर्षो की उपलब्धियाँ

 

क्र.म

वर्ष

एमटीपी

1

2012&13

23965

2

2013&14

22437

3

2014&15

21895

4

2015-16 (दिसम्बर 2015)

15524

 

गर्भ निरोधक साधनों की उपलब्धता

1.स्थाई साधन

महिला- महिलाओं के लिए परम्परागत, लेप्रोस्कोपिक (दूरबीन) एवं मिनीलेप विधियां/तकनीक उपलब्ध है।
पुरूष - पुरूषों के लिए परम्परागत एवं एनएसवी विधि उपलब्ध है।

2. अस्थाई साधन

विभाग द्धारा परिवार नियोजन साधनों की अपूरित मांग को पूरा करने हेतु विशेष प्रयास किये गये हैं। विभाग द्वारा प्रत्येक उपकेन्द्र, प्रा.स्वा.केन्द्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, एफ.आर.यू., जिला अस्पताल, डिस्पेन्सरी आदि के अतिरिक्त आंगनवाड़ी केन्द्र आयुर्वेद औषधालय, आशा सहयोगिनी के माध्यम से प्रत्येक गाँव में गर्भ निरोधक साधन उपलब्ध करवाना सुनिश्चित किया गया है।

एन.एस.वी. पुरूष नसबन्दी

हमारे देश में परिवार नियोजन के साधनों में पुरूष नसबन्दी की बजाय महिला नसबन्दी अधिक प्रचलित है। गत वर्ष में कुल नसबन्दी में मात्र 1.42 प्रतिशत ही पुरूष नसबन्दी का योगदान रहा है। आज हमारे सामने महिला नसबन्दी पर ज्यादा जोर देना व पुरूष नसबन्दी को नजर अन्दाज करने की धारणा व्याप्त होना एक चुनौती है। कुछ वर्ष पहले वर्ष 1997-98 में चिकित्सा जगत में पुरूष नसबन्दी के क्षेत्र में एक चमत्कारी आविष्कार बिना चीरे की पुरूष नसबन्दी ‘‘नॉन स्कलपल वासेक्टोमी‘‘ (एनएसवी) के रूप में हुई है, जो धीरे-धीरे लोकप्रिय होती जा रही है। पिछले वर्षो में राज्य में एनएसवी की उपलब्धि में उत्तरोतर बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 1999-2000 में जहां 1069 पुरूष नसबन्दी हुई थीं वहीं वर्ष 2012-13 में 4949 पुरूष नसबन्दी तथा वर्ष 2014-15 में 4304 पुरूष नसबन्दी हुई है तथा वर्ष 2015-16 में माह दिसम्बर 2015 तक 3314 पुरूष नसबन्दी हुई है। पुरूष नसबन्दी की सेवाएं निकटतम दूरी पर उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से चयनित चिकित्सकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

एनएसवी नसबन्दी को बढ़ावा देने एवं अनुकूल वातावरण तैयार करने के लिए अन्य सहयोगी विभागों, जनप्रतिनिधियों एवं सामुदायिक मुखियाओं का सहयोग प्राप्त कर आयोजित किये जाने वाले केम्पों को सफल बनाने का प्रयास किया गया है। सभी जिलों में आयोजित किये गये विशेष केम्पों के लिए आवश्यक साधन सुलभ करवाकर एवं विशेष प्रचार-प्रसार की व्यवस्था कर सेवाएँ उपलब्ध करवाई जा रही है।

प्रसवोत्तर परिवार कल्याण सेवाऐ

राज्य में संस्थागत प्रसवों में व्यापक वृद्धि होने एवं प्रसव पश्चात् महिला के चिकित्सा संस्थानों में 48 घंटे ठहराव होने के कारण इस अवधि में प.क. सेवाए प्रदान करने हेतु भारत सरकार ने प्रसवोत्तर प.क. कार्यक्रम प्रारम्भ किया है। इस कार्यक्रम के अन्तर्गत प.क. परामर्षक द्वारा प्रसव पश्चात् चिकित्सालय में महिला के ठहराव अवधि के दौरान परिवार को सीमित रखने हेतु विभिन्न प.क. साधनों के बारे में जानकारी देते हुऐ पीपीआईयूसीडी, मिनीलेप ऑपरेषन हेतु महिला को प्रेरित किया जाता है। वर्ष 2013-14 में 11849 वर्ष 2014-15 व में 41528 एवं वर्ष 2015-16 में माह दिसम्बर 2015 तक 76609 पीपीआईयूसीडी निवेषित की जा चुकी है।

परिवार कल्याण सेवाएं प्राप्त करने वाले योग्य दम्पत्तियों को निम्नानुसार लाभान्वित किया जा रहा हैः

नसबन्दी कराने पर क्षतिपूर्ति राषि का नकद भुगतान

परिवार कल्याण के स्थाई साधन नसबन्दी को प्रोत्साहन देने हेतु सरकारी चिकित्सालयों में नसबन्दी कराने पर प्रत्येक पुरूष एवं महिला को क्रमशः 2000/- व 1400/- रूपये की क्षतिपूर्ति राशि नकद दिये जाने तथा प्रसवोत्तर नसबन्दी को प्रोत्साहित करने हेतु प्रसवोत्तर महिला नसबन्दी पर 2200/- रूपये दिये जाने का प्रावधान किया गया है। पुरूष व महिला नसबन्दी हेतु प्रेरित करने पर प्रेरक को क्रमशः 300/- रूपये व 200/- रूपये तथा प्रसवोत्तर नसबन्दी को 300/- रूपये का भुगतान करने का प्रावधान है।

नसबन्दी ऑपरेशन से मृत्यु एवं जटिलताए होने पर परिवार कल्याण बीमा योजना के तहत देय क्षतिपूर्ति राशि

नसबंदी ऑपरेशन पर मृत्यु एवं अन्य जटिलताएँ उत्पन्न होने पर क्षतिपूर्ति राशि के भुगतान हेतु प.क. इन्डेमनिटी योजना जो 01.4.2013 से राज्य में संचालित है क्षतिपूर्ति राषि का भुगतान किया जा रहा है इस योजना के अन्तर्गत नसबंदी ऑपरेशन के समय या पश्चात मृत्यु एवं अन्य जटिलताएं उत्पन्न होने पर निम्नानुसार क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान किया जा रहा है।

1. नसबंदी ऑपरेशन से अस्पताल में मृत्यु होने पर या अस्पताल से छुट्टी मिलने के 7 दिन के भीतर ऑपरेषन की वजह से मृत्यु होने पर 2,00,000/- रूपये

2. नसबन्दी ऑपरेशन के उपरांत अस्पताल से छुट्टी मिलने के 8 से 30 दिन के भीतर मृत्यु होने पर 50,000/- रूपये

3. नसबन्दी ऑपरेशन असफल होने पर (बच्चों को जन्म देने या नहीं देने दोनों स्थिति में) 30,000/- रूपये

4. नसबंदी कराने के उपरान्त अस्पताल से छूट्टी मिलने के 60 दिन के भीतर नसबन्दी ऑपरेशन की वजह से होने वाली जटिलताओं के ईलाज के लिए राशि वास्तविक व्यय या अधिकतम 25,000/- रूपये तक

5. इण्डेमिनिटी इंश्योरेंस (Indemnity Insurance) प्रति चिकित्सक/संस्था लेकिन 1 वर्ष में 4 से अधिक नहीं 2,00,000/-रू. 

उपरोक्त क्रम संख्या 1 में वर्णित शर्त के अनुसार नसबन्दी केस की मृत्यु की स्थिति में जिला स्तरीय रोगी कल्याण समिति/मेडिकल रिलीफ सोसायटी से 50,000 रूपये की राशि एक्सग्रेशिया के रूप में परिवार वालों को तुरन्त दी जाती है।

उक्त योजना के अन्तर्गत दिसम्बर, 2015 तक नसबन्दी असफल के 1773, नसबन्दी जटिलता-1 एवं नसबन्दी मृत्यु के दो कुल 1276 प्रकरणों को नियमानुसार भुगतान किया गया।

गैर सरकारी संगठन व निजी चिकित्सालयों को नसबन्दी ऑपरेशन करने तथा आई.यू.डी. निवेशन पर प्रोत्साहन योजना

गैर सरकारी संगठन/निजी चिकित्सा संस्थान द्वारा नसबन्दी ऑपरेशन/आईयूडी निवेशन करने पर प्रोत्साहन योजना के अन्तर्गत पंजीकृत गैर सरकारी संगठन/निजी चिकित्सा संस्थान द्वारा पुरूष/महिला नसबन्दी ऑपरेशन करने पर 3000/- रूपये, प्रति केस की दर से दिये जाते है जिसमें से 1000/- रूपये की क्षतिपूर्ति राषि केस को देने की अनिवार्यता है। इन संस्थाओं द्वारा नसबन्दी केसेज से कोई यूजर फीस नहीं ली जायेगी अर्थात निःशुल्क नसबन्दी ऑपरेशन किए जाएंगे। आईयूडी निवेशन पर इन संस्थाओं को 75/- रूपये प्रति केस की दर से दिये जाते है।

पंजीकृत गैर सरकारी संगठन/निजी चिकित्सा संस्थानों पर भी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा नसबन्दी ऑपरेशन पर मृत्यु एवं अन्य जटिलताएं उत्पन्न होने पर क्षतिपूर्ति राशि के भुगतान हेतु सम्बन्धित इण्डेमनिटी योजना के अनुसार लाभ देय होंगे।

Linelisting of NSV/LS/MINILAP Service Provider. Letter no 438 dt 02.11.2016
District-wise Human Line Listing Of Sterilization Trained/Empanelled Providers

User manual Draft e-Saadhan

Link for e Saadhan- http://e-saadhanraj.dcservices.in/eSadhan/startup/loginAction

अनौपचारिक टिप्‍पणी:- क्रमांक:-543 दिनांक 16/01/2016 (SQAC, DQAC and DISC की सूची)

  1. Service providers line listing-2017-18 -May 2017
  2. Service Providers Performance-2017-18-May 2017
  3. DQAC-DISC-rajasthan-May 2017
  4. Audit Report Gajju Devi Wo Gulab
  5. FP Annual-Biannual Report 2017-18 - Rajasthan
  6. FPIS Report 2016-17 Rajasthan
  7. Meeting Minutes SQAC Dt. 30.06.2017

For more information contact :-
Nodal Officer – Dr. O.P. Kulheri Project Director, Family Welfare– 9460733955

Email ID: projectdirector.fw@gmail.com